# सकारात्मक सोच #



हमें अपनी सोच हमेंशा सकारात्मक रखनी चाहिए चाहे सामने वाला ब्यक्ति कितना भी नकारात्मक क्यों न हो। हम अपने सकारात्मक सोच से उसके साथ आचरण करेंगे और करते ही रहेंगे तो एक न एक दिन उसका भी आचरण सकारात्मक हो ही जाएगा । हम जो भी सोचते हैं उसका तरंग हवा में फैलता है और संबन्धित ब्यक्ति तक पहुंचता है,चाहे वह ब्यक्ति कितनी भी दूरी पर हो। हमारे द्वारा जो तरंग उसे प्राप्त होता है उससे उसके विचारों का निर्माण होता है। यदि हम भी उसी की तरह नकारात्मक सोच रखते हों तो हमारे उसके बीच के संबंध कभी भी नहीं सुधरेंगे। अतः हमें अपनी सोच की दिशा सही रखनी चाहिए | एक न एक दिन ऐसा समय आएगा कि संबन्धित ब्यक्ति हमारी भावनाओं को समझ सकेगा और हमारे सम्बंध को सही दिशा मिलेगी ।

आपने टेलीपैथी का नाम अवश्य सुना होगा—यह एक ऐसी विधा (स्किल) है जिसके द्वारा योगी लोग अपने संदेशों को ईच्छित ब्यक्ति तक पहुंचाते हैं। इस विधा में किसी INSTRUMENT या तार का उपयोग नहीं किया जाता है । इसीतरह हमारे मन में उपजते विचार हवा में तरंगों द्वारा एक दूसरे तक पहुँचते रहते हैं । अतः हमें अपने मन में उपजने वाले विचारों को नियंत्रित करना चाहिए। इसके लिए हमें समाचार पत्र पत्रिकाओं या कोई भी रीडिंग मटिरियल अपनी सूझबूझ को जागृत रखते हुए पढ़ना चाहिए एवं सोशल मीडिया या टीवी देखना सुनना इन सभी क्रिया कलापों पर नियंत्रण आवश्यक हो जाता है, ताकि हम नकारात्मक दृश्य, पठन सामग्री से दूरी बनाकर रखें ।

ये नकारात्मक ऊर्जा का स्पन्दन करते हैं। जिससे अपराधों में वृद्धि होती है और हमारा सामाजिक वातावरण कलुषित होता है। सामान्यत: ऐसा देखा जाता है कि लोग आपराधिक घटनाओं से संबन्धित खबरों को चटकारे लेकर पढ़ते और एक दूसरे को सुनाते हैं। यह गलत तरीका है। इससे नकारात्मक ऊर्जा फैलती है। अब्बल तो ऐसे समाचारों को पढ़ने से परहेज करना चाहिए। यदि पढ़ना आवश्यक ही हो तो अपने मन में पढ़कर रखें इसे फैलाने से बचें इसे ही नकारात्मक स्पंदन को रोकने का तरीका समझें।



आज जो समाज में इतनी बुराइयां हैं वे पहले कभी नहीं थीं। जब भी किसी अलग तरह की आपराधिक घटना होती है,जो नए प्रकार की है जिस तरह की घटना पहले कभी नहीं सुनी गई हो,उसकी खबर समाचार पत्रों दूरदर्शन या सोशल मीडिया में आते के साथ वातावरण में हर गली हर चौक चौराहे पर इसकी चर्चा शुरू हो जाती है। इससे वातावरण में एक नकारात्मक ऊर्जा का स्पंदन होकर लोगों (जो पहले से ही नकारात्मक सोच से प्रभावित हैं) के दिमाग में इस प्रकार के विचार आने लगते हैं और इस प्रकार की घटना में वृद्धि होने लग जाती है। इसी प्रकार नकारात्मक विचार धारा का प्रवाह होने लगता है।

अतः हमें यदि किसी नकारात्मक समाचार मिलते हैं चाहे सोशल मीडिया हो या अन्य श्रोत से ,उसपर सोचना उसे फैलाना या चर्चा करना ही नकारात्मक स्पंदन पैदा करना है। अतः हमें ऐसे कार्यों से बचना चाहिए।


:-- मोहन”मधुर”

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