विचारों का सिलसिला


हमारे मन में विचारों का अनवरत सिलसिला चलता रहता है। लेकिन, उन विचारों को हम प्रकट नहीं कर पाते। कारण हमारे मन में वे विचार या तो टिक नहीं पाते, आते और चलेजाते हैं,या हम उसे प्रकट करने में हीचकिचाहट महसूस करते हैं। सोचने लगते हैं हमारे ये विचार किसे पसंद आए या नहीं आए, लोग क्या सोचेंगे? इसप्रकार की अनेकानेक भावनाओं के कारण ये विचार मन के अंदर ही कुंठित होकर रह जाते हैं। परन्तु, कभी कभी ये विचार बहुमूल्य भी होते हैं।

दुनिया में जितने लोग हैं, उनके विचार अपने होते हैं। कोई जरूरी नहीं कि सबके विचार एक दूसरे से मेल खाते हों। जब हमारे मन में कोई विचार आता है तो हम सोचने लगते हैं कि इसका समर्थन करने वाला कोई होगा या नहीं होगा। मन ही मन हम समर्थकों की तलाश में जुट जाते हैं। परन्तु, हमें जानना चाहिए कि विचारों के जन्म की अलग अलग परिस्थितियाँ होती हैं और इन परिस्थितियों के जन्म हर ब्यक्ति में अलग अलग विचार पैदा करते हैं। कोई जरूरी नहीं कि एक ही परिस्थिति में रहने वाले प्रत्येक ब्यक्ति के मन में एक ही विचार पैदा हो। फिर, वे अनुभव पर आधारित हो जाते हैं। पुनः, प्रत्येक ब्यक्ति का अनुभव अलग अलग हो सकता है। एक ही परिस्थिति में कुछ लोग एक प्रकार का अनुभव करते हैं तो कुछ लोग दूसरे प्रकार का। इस प्रकार एक प्रकार से सोचने वाले,अनुभव करने वाले और विचारों वाले ब्यक्तियों का एक समूह बन जाता है तो दूसरे प्रकार से सोचने वाले, अनुभव करनेवाले और विचारों वाले ब्यक्तियों का दूसरा अलग समूह।

प्रत्येक नए विचारों को प्रायः विरोधों का सामना करना पड़ता है। आज तक जितने विचारक, चिंतक या वैज्ञानिक सिद्धान्त देने वाले हुए हैं उनको प्रारम्भ में विरोधों का सामना करना पड़ा है। लोग उन्हें पहले अपसेट या पागल समझते हैं। लेकिन, जब धीरे धीरे उनके विचारों को समझने वालों और मान्यता देने वालों की संख्या बढ़ती है तो विरोध करने वाले भी उनके पक्ष में सोचना, समझना और उसपर मंथन करना शुरू कर देते हैं। एक दिन फिर वैसे लोग भी उन विचारों के समर्थन में उतर आते हैं जिन्होंने पहले उसके पूरे विरोधी थे।

इसलिए यदि आपके मन में कोई विचार आए और आप उस विचार से संतुष्ट हों तो उसे लिखने, बांटने या फैलाने में कोई हिचक न रखें। विचार चिंतन से ही पैदा होते हैं, बांटने से ही फैलते हैं और फैलाने से ही उसपर मंथन होता है और मंथन के बाद ही उसपर आम सहमती बनती है। क्या पता किसके मन से निकला विचार समाज और देश में कौन से परिवर्तन का कारण बन जाये। ये मेरे मन में आए अपने विचार हैं........ आगे आपको और खुद आपको करना है।

:--- मोहन”मधुर”

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