ये ज़िन्दगी


हमारी जिंदगी हमें अपने पूरे जीवन काल में तरह-तरह के रंग दिखाती रहती है। इन विविध रंगों के अनुभव हमारी इस जीवन यात्रा को रोचक और रोमांचक बनाता है।

हम जरा कल्पना करें - कि किसी यात्रा में हम निकले हों और यात्रा में विविधता नहीं हो तो कैसा महसूस होगा? यात्रा में आनंद तभी महसूस होगा न जब हमें अलग अलग प्रकार के दृश्य देखने को मिलेंगे जैसे पहाड़, घाटी, नदी, झरने, बादलों से आच्छादित पहाड़, सफेद बर्फ की चादर से ढ़ंके पहाड़, उन पहाड़ों पर पड़ती उदीयमान अथवा अस्ताचलगामी सूरज की सुनहरी किरणें। तरह तरह के फूलों से भरे बाग, कभी ऊंचाईयों कभी ढ़लान से गुजरती टेंढ़ी मेंढ़ी सड़कें, सड़कों से गुजरते अलग अलग प्रकार के लोग, लोगों के अलग अलग प्रकार के पहनावे।

अब, यात्रा के क्रम में ऐसा भी समय आता है जब लम्बे सफ़र से थक गये आराम करने को जी चाहता है और मंजिल अभी दूर है। मन में उदासी छाने लगती है, कोई चाय नाश्ते की दूकान की मन में तलाश जगती है, दूर तक चलते रहने के बावजूद कुछ खाने को नहीं मिलता | यह जीवन के दुःख के समय के समान है। फिर, कल्पना करें गाड़ी खराब हो जाती है और जगह सुनसान है, रात के नौ या दस बजे हैं आकाश में बादल गरज रहे हैं। आपका मन यात्रा के इस पड़ाव की अवस्था में कैसा महसूस करेगा ? इस यात्रा में मान लीजिए इससे भी बद्तर स्थिति आ गई आंधी और वर्षा दोनों एक साथ आ गई और वहां छुपने की कोई जगह नहीं है। यह पड़ाव जीवन में घोर बिपत्ती के समान है।

अब अकस्मात कोई टैक्सी वाला आकर कहता है मेरा घर पास के एक किलोमीटर की दूरी पर गांव में है और आपको अपने घर चलने का आग्रह करता है। आपके साथ परिवार और बच्चे भी हैं। आप ऐसी स्थिति में क्या सोचेंगे? यह स्थिति आपके मन में डर,शंका के बीच मजबूरी में विश्वास पैदा करने को वाध्य करेगा। आप उसपर विश्वास कर उसके घर जाने को तैयार हो जाते हैं। आप अपने मन में तरह तरह की आशंकाओं से घिरे वहां पहुंच कर एक गरीब की मेजबानी स्वीकार कर उसके अपनी गाय, जिसे उसकी पत्नी ने अपनी मेहनत से पाल रखी है, का दूध और उसके तवे की रोटी खाकर सो जाते हैं। चाय बिस्कुट के दर्शन के साथ आप की शुबह होती है और टैक्सी वाला आपको अपनी गाड़ी तक छोड़ देता है साथ में मरम्मती के लिए मेकेनिक भी देता है अगले घंटे दो घंटे में आप अपने गंतव्य तक पहुंचने में सफल हो जाते हैं। यहां एक अच्छे से होटल में आपका पड़ाव होता है। साथ ही विभिन्न तरह के जायेकेदार भोजन से आपका मन तृप्त हो जाता है। यहां हमें रोमांचित करने वाले जीवन का अनुभव होता है उसके बाद आनंद की प्राप्ति भी ।

इन्हीं सब प्रकार के सुख दुःख, खट्टे मीठे जीवन के अनुभवों पर आधारित मेरी एक कविता प्रस्तुत है।

# ये ज़िन्दगी #

ये ज़िन्दगी

कभी मुस्कुराती, कभी हंसती

कभी कड़ाहती, कभी सिसकती

ये ज़िन्दगी!

कभी दौड़ती, कभी चलती

कभी खिसकती, कभी मचलती

ये ज़िन्दगी!

कभी सजती, कभी संवरती

कभी बिखरती,कभी उदासी भरी

ये ज़िन्दगी!

कभी अपनों में परायापन

कभी परायों में अपनापन

महसूस कराती

ये ज़िन्दगी!

कभी पता नहीं -

मौत ज़िन्दगी को ढूंढ रही है

या ज़िन्दगी मौत को

इस पहेली में उलझती, गुजरती

ये ज़िन्दगी!

कभी सजती, कभी संवरती

कभी बिखरती,

कभी पहेली बनी

खिलखिलाती ये ज़िन्दगी!

खुद नाचती ,सबको नचाती

ये ज़िन्दगी!

..मोहन "मधुर"

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