# मेडिटेशन कैसे करें ?(भाग-1)#



मेडिटेशन का शाब्दिक अर्थ है ध्यान। ध्यान का मतलब है अपने आप को एक स्थिर (मानसिक और शारीरिक) अवस्था में स्थापित करना। इस प्रक्रिया में अपने मन, बुद्धि और संस्कार को समर्पित कर विचार शून्यता की स्थिति को प्राप्त करना पडता है। इस स्थिति को पाने के लिए निरंतर अभ्यास की आवश्यकता होती है। हमारा मन स्वभाव से चंचल है,इसमें सतत रूप से कुछ न कुछ विचार आते रहते हैं। दूसरे शब्दों में-- इन आते हुए विचारों से अपने आप को अलग रख कर विचारशून्यता की स्थिति को प्राप्त करने की प्रक्रिया ही ध्यान है।

मैं यहाँ बताना चाहता हूँ कि पिछले कुछ वर्षों से मेडिटेश का मेरा जो अनुभव रहा है वह प्रजापिता ब्रम्हाकुमारी संस्था से जुड़ कर किए गए कोर्स के माध्यम से और कुछ साहित्य,भिडियो इत्यादि के अध्ययन और (प्रैक्टिकल प्रयास) अभ्यासों पर आधारित है। जिसे मैं शेयर करना उचित समझता हूँ।

ध्यान करते समय हम कैसे बैठें या खड़े रहें इन सब बातों से भी फर्क पडता है। यदि बैठकर ध्यान करते हैं तो ध्यान करना अधिक आसान होता है। अब,बैठ कर ध्यान करने में भी यह जानना जरूरी हो जाता है कि किस प्रकार बैठें? इसके अलग अलग आसन की बात ऋषि मुनियों द्वारा बताई गई है जैसे पद्मासन,सिद्धासन,सुखासन अर्धपद्मासन अर्धसिद्धासन इत्यादि। फिर भी कुछ जानकारों द्वारा बताया जाता है कि जिस स्थिति में आपको सहज मह्सूस हो उस स्थिति में बैठा जा सकता है। लेकिन,बैठने में आपकी कमर,रीढ़,गर्दन सीधी (straight) रहनी चाहिए। यदि बैठे हैं तो एक बात और भी महत्व रखता है कि आपके पैर की कोई एक एड़ी आपके जननेन्द्रियों और गुदा मार्ग के बीच सटा हो इससे गहरे ध्यान मेँ प्रवेश पाना आसान होता है। अक्सर जब हम ध्यान में जाने लगते हैं तो हमारा सर झुकने लग जाता है,गर्दन टेढ़ी होने लग जाती है। ऐसी अवस्था से अपने को बचाना जरूरी होता है अन्यथा हम ध्यान की ऊंचाइयों पर पहुँचने से बंचित रह जाते हैं साथ ही हमें लाभ के बदले किसी प्रकार की हानि भी महसूस हो सकती है। ध्यान करते समय अपने मन को एकाग्र करना सबसे प्रमुख है। इसके लिए सतत प्रयास के बाद ही सफलता मिल पाती है और ऐसा भी नहीं कि एक बार सफल हो गए तो हमेंशा के लिए सफलता मिल गयी । यह आपके मनः स्थिति पर निर्भर करता है कि आप कितनी जल्दी सफल होते हैं। मन को बांधना एक लगातार किए जाने वाला कार्य है। यदि आज आपका ध्यान सफलता पूर्वक हो गया तो कोई जरूरी नहीं कि कल भी इसीप्रकार सफल हो जाएगा। इसलिए यदि कुछ दिनों तक सफलता नहीं मिलती है तो घबड़ा कर उसे छोड़ देना उचित नहीं। लगातार करने का प्रयास जारी रखना चाहिए।



मन को केन्द्रित करने के लिए:-- अपने बुद्धि, विचारों का समर्पण कर अपनी आँखें अधखुली अथवा सम्पूर्ण बंद रख सकते हैं। अब इस अवस्था में आप दूर देखने का प्रयास करें पहले थोड़ी दूर। फिर थोड़ा अधिक,फिर थोड़ा अधिक इसप्रकार अपनी दृष्टि क्षमता बढ़ाते जाएँ। शुरू में आँखें बंद करने पर बिलकुल अंधेरा या काला चाँद (dark spot)दिखेगा इससे घबराएँ नहीं उसी काले चाँद पर लगातार मन को केन्द्रित करते रहें अब, आपको धीरे धीरे उस चाँद में छेद होता हुआ दिखाई देगा। अब, उस छेद के अंदर दृष्टि डालकर देखते रहने का अभ्यास करते रहने से उसके अंदर का हिस्सा ग्रे कलर का दिखने लगेगा। इस ग्रे कलर पर ध्यान केन्द्रित करने पर काला भाग धीरे धीरे दिखना बंद होकर ग्रे कलर का चाँद हो जाएगा जो आपके लगातार प्रयास और अभ्यास के बाद अपना आकार बढ़ाते चला जाएगा और आपकी द्र्श्टि दूर तक और बड़े आकार में फैलती चली जाएगी। इसके बाद आपको क्या आनंद मिलता है? यदि हो सके तो हमारे कॉमेंट बॉक्स में अवश्य बतावें। फिर हम अगले भाग में इसपर मंत्रणा करेंगे............ ।

:-- मोहन”मधुर”

63 views4 comments

Recent Posts

See All