मधुमेह से कैसे बचें ?


आज हम जिस वातावरण में जी रहे हैं उसमें हमें स्वस्थ्य रहना एक चुनौती पूर्ण कार्य हो गया है। अतः हमें स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होना बहुत जरूरी है। हमें अपने खान पान यानि आहार विहार को संयमित रखना ही आज के युग की डरावनी बीमारियों से दूर रखने में हमारी मदद करेगा। आज कल हमारे देश में मधुमेह, ब्लडप्रेसर यानि उच्च रक्तचाप एक महामारी के रूप में हमारे सामने खड़ा हमें मुँह चिढ़ा रहा है।

जैसे ही कीसी ब्यक्ति को पता चलता है कि उसे मधुमेह है, वह शक्कर का उपयोग बंद कर देता है। परंतु इसके बावजूद ब्लड शुगर नियंत्रित करना कठिन महसूस होता है।

आइये हम जानें कि यह शक्कर क्या चीज है?

शक्कर कार्वोज युक्त वस्तुओं का सबसे साधारण अणु होता है। कर्वोहाइड्रेट युक्त जितनी भी चीजें हम खाते हैं वो अंत में साधारण ग्लूकॉज़ में बदल जाती है। ऊर्जा के लिए शरीर को हर समय ग्लूकोज की जरूरत पड़ती है। इसलिए हमारे खून में हर समय 80 से 120 मिली ग्राम के हिसाब से शर्करा(glucose) मौजूद होता है जो जरूरी है। कुछ लोग शक्कर के बदले गुड शहद इत्यादि का उपयोग करने लगते हैं। लेकिन ये सभी शर्करा के ही रूप हैं। इसलिए हमें यदि शक्कर की मात्रा खून में घटानी हो तो शक्कर के साथ गुड,शहद,फ्रूट्जूश ये सभी वस्तुएँ अपने भोजन से दूर करनी होंगी। खाने की हर वस्तु में किसी ना किसी मात्रा में शर्करा मौजूद होता है। दूध में पाये जाने वाले शर्करा को लैकटोज, फलों में पाये जाने वाले शर्करा को फ्रूक्टोज़ और साधारण रूप से शक्कर में पाये जाने वाले को सुक्रोज कहते हैं जो दो ग्लूकोज के अणुओं से मिल कर बनता है।

मधुमेह से ग्रसित ब्यक्तियों के लिए यह जानना आवश्यक है कि वे क्या खाएं या क्या नहीं खाएं।

तैयार या पैकेट बन्द चीजों से परहेज करना मधुमेह से ग्रसित ब्यक्तियों के लिए बेहतर उपाय है। फिर भी यदि इससे पूर्णतया परहेज नहीं कर सकते तो सजगता जरूर बरतें। पैकेट बन्द वस्तुओं को खरीदते समय उसके लेवेल को देखें कि उसपर मालटोज, इंवेर्टेड शुगर, कोर्नस्वीटनर, केनसुगर,माँल्ट सिरप, मोलेसेस आदि इंग्रेडिएंट्स लिखे तो नहीं हैं। यदि हैं तो इन वस्तुओं के सेवन से परहेज करें।क्यूं कि ये सभी शुगर के ही बदले नाम या रूप हैं।



क्या खाएँ ?

इसको समझने के ल्लिए हमें यह जानना जरूरी है कि कोई भी खाद्य पदार्थ हमारे शरीर में जाने के बाद हमारे खून में कितनी मात्रा में शर्करा को बढ़ाएगा। इसको मापने के लिए जो यूनिट है उसे हम ग्लाइसेमिक इंडेक्स के नाम से जानते हैं। इसे छोटे रूप में जी आई भी कहते हैं। यह कार्बोहाइड्रेट से युक्त पदार्थों की माप है जो बताता है कि हमारे भोजन में उपस्थित कार्बोहाइड्रेट किस स्तर तक खून में शर्करा की मात्रा बढाएगा। किसी भी खाद्य पदार्थ का ग्लाइसेमिक इंडेक्स जितना अधिक होगा उसे खाने से खून में शर्करा उतनी ही अधिक मात्रा में बढ़ेगी। यह बहुत ही आवश्यक और उपयोगी तरीका है जिससे हम जान सकते हैं कि कौन सा पदार्थ खाने से मधुमेह वाले ब्यक्ति कितना सुरक्षित या जोखिम में होंगे।

अब हमें यह जानना जरूरी है कि किस खाद्य पदार्थ का ग्लाइसेमिक इंडेक्स ज्यादा है:---

फेद चावल,ब्रेड़,चावल से बनी चीजें (जैसे मूढ़ी,पोहा) मैदा,कोर्नफ़्लेक्स,केक, बिस्किट्स, आलू,पिज्जा ,फास्टफूड ,शक्कर गुंड ,खजूर, कोल्ड ड्रिंक्स,चोकलेट्स,मैदे से बनी मीठी चीजें आदि का जीआई 70 से अधिक है।

गेहूं, बड़े दाने वाला बासमती चावल,ब्राउन-राइस,मटर,जिमिकन्द,शकरकंद,पपीता, केला,आम,अंजीर, अनानास,खरबूज,किशमिश,आइसक्रीम,शहद आदि। माध्यम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले खाद्य पदार्थ हैं।

अब, हम यह जानें कि मधुमेह ग्रसित रोगियों के लिए सुरक्षित खाद्य पदार्थ क्या हैं?:---

जौ,दलिया,ओट्स, मूंग की दाल,अरहर की दाल राजमा,लोबिया,छोले,सोयाबीन,हरी पत्तेदार सब्जियाँ, फलों में कीवी मौसमी,सेव,संतरा,आलूबुखारा,नासपाती,बेर,जामुन,अमरूद,दूध एवं इससे निर्मित चीजें जैसे बिना शक्कर के खीर,दही,छाछ,सब्जियों के सूप, मूँगफली,अलसी यानि तीसी बादाम,अखरोट,कद्दू (कोहरे) के बीज सूरजमुखी के बीज,अंडा,मीट इत्यादि।

आइये जानते हैं भोज्य पदार्थ का मिश्रण जीआई को कैसे कम करता है?:---

एक भोज्य पदार्थ दूसरे भोज्य पदार्थ के साथ जब हम मिला कर लेते हैं, तो उसका मिश्रण जी आई वैल्यू को बादल देता है। हम यदि बासमती चावल सादा खा रहे हैं तो उसका जीआई मध्यम होगा। लेकिन यदि उसे दही,कढ़ी,छोले,राजमा या अन्य वस्तुओं के साथ खाते हैं तो उसका जी आई अलग होगा छोले राजमा आदि में मौजूद रेशे और प्रोटीन जीआई को कम कर देंगे। मूढ़ी या मुरमुरा अकेला खाया जाए तो इसका जी आई वैल्यू हाई होगा,परंतु इसे मूँगफली या चने के साथ आधी आधी लेने पर यह मध्यम जी आई वाला हो जाएगा। इसतरह का मिश्रित खाद्य पदार्थ फायदेमंद होगा इसमें फाइबर भी मिलेगा और प्रोटीन भी।

इसीप्रकार, हम पूरी गेहूं के आंटे की रोटी ना बनाकर इसमें आधे चने का आंटा भी मिला दें तो ऐसे मिश्रित आंटे की रोटी-पराठे का जीआई मध्यम ना होकर कम हो जाता है। इसीतरह,यदि हम रोटी के साथ केवल सब्जी खाते हैं तो भोजन का जी आई उच्च होगा लेकिन उसके साथ दही,दाल या रायता भी लेते हैं तो भोजन का जीआई कम हो जाएगा। इसतरह,भोज्य पदार्थों के अंदर अवस्थित शक्कर को पहचानने में जीआई हमारे लिए मददगार होता है और इस आधार पर हम संतुलित भोजन का मेल बनाकर मधुमेह को नियंत्रण में रखने पर काबू पा सकते हैं और अपने को इस बीमारी से बचा भी सकते हैं।

(नोट :--यह जानकारी आहार विशेषज्ञ के द्वारा सुझाए गए आलेख पर आधारित है)


:---मोहन "मधुर"

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