जोड़ों और मांसपेशियों के दर्द और सूजन में हम क्या करें?



आइये,हम पहले जोड़ों और मांसपेशियों के दर्द या सूजन में गर्म और ठन्ढ़ी सिकाई के अंतर को समझें:-----

हम जब उम्र के ढलान पर आ जाते हैं तो अक्सर हमें ज़ोडों और मांस पेशियों के दर्द से गुजरना पड़ता है। ऐसी स्थिति किसी ब्यक्ति के घर-परिवार के सदस्यों या खुद के साथ कभी भी आ सकती है। हमें ऐसी स्थिति से निपटने हेतु कुछ स्पष्ट समझ बनाना जरूरी है।

जोड़ों और मांसपेशियों के दर्द में या सूजन में हड्डी रोग विशेषज्ञो का मानना है कि हीट और कोल्ड बैग से सिकाई बहुत ही मददगार साबित होते हैं। इन दोनों(हीट और कोल्ड बैग) के काम हमारे तकलीफ को दूर करना है। लेकिन, कौन सा बैग कब उपयोग करना है इसे जानना हमारे लिए नितांत आवश्यक है। यानि ठन्ढ़ी सिकाई कब करें और गर्म सिकाई कब?

गर्म सिकाई

मांस पेशियों या जोड़ों के दर्द के लिए यदि गर्म बैग से सिंकाई करते हैं तो उस जगह का रक्त संचार बढ़ जाता है। प्रभावित जगह का रक्त संचार अच्छा होने से वहाँ के टिशू को पर्याप्त मात्रा में खून मिलेगा और दर्द थोडा कम हो जाएगा। इसके साथ ही मांस पेशियाँ भी मुलायम हो जाएंगी। हीट थिरैपी दो तरह की होती है— .

1॰ड्राई हीटथिरैपी— इसमें आता है कपड़े को गर्म करके सिकाई करना,हीटींग पैड से सिकाई करना।

2॰ मोयस्ट हीटथिरैपी – इस विधी में आता है गर्म पानी में कपड़े भींगों कर सिकाई करना। यह विधी ज्यादा असरदार होती है। क्यूंकि यह टिशू के अंदर तक जल्दी चली जाती है। इससे कम समय में अच्छा परिणाम मिल सकता है। ऐसे सीधे भाफ से भी सिकाई किया जा सकता है जैसे कि स्टीम बाथ।

* अगर जोड़ों में पुराना दर्द या मांसपेशियों में दर्द या अकड़न रहती है तो गर्म बैग से सिकाई की सलाह दी जाती है। * अगर चोट लगी है और लंबे समय से सूजन है या चोट लगने वाली जगह पर लंबे समय से दर्द है,मांसपेशियों में अकरण या दर्द रहता है,तो गर्म बैग से सिकाई किया जा सकता है। * एड़ियों के दर्द में गर्म पानी की सिकाई करें। * गुदा की हड्डी में चोट लगने से यदि दर्द और बेचैनी हो तो गर्म पानी की सिकाई कर सकते हैं। यहाँ सीधे तौर पर सिकाई नहीं हो सकती है इसलिए गुंण गुने पानी की सिकाई कर सकते हैं। * सर्जरी या ओपरेशन के बाद पुराने दर्द या मांसपेशियों की अकरण में गर्म सिकाई की सलाह दी जाती है। * अगर केवल पुराना दर्द है,ब्यायम नहीं कर रहे हैं फिर भी दर्द है,अकड़न है और सूजन नहीं है तब भी गर्म सिकाई की ही आवश्यकता है। * गर्म पानी की सिकाई करते समय प्रभावित भाग केवल 10-15 मिनट के लिए पानी में डालें फिर हटा दें। कुछ मिनटों बाद प्रभावित भाग को फिर पानी में डालें।



ठन्ढी सिकाई

जैसे ठंढे बैग से सिकाई करना । इस विधी से सिकाई करने पर प्रभावित जगह पर रक्त पहुंचाने वाली रक्त वाहिकाएँ सिकुड़ जाती हैं। जिससे वहाँ का रक्त संचार थोड़ा कम हो जाता है। अगर उस जगह पर कोई बीमारी या सुजन है तो रक्त संचार कम होने से सूजन थोड़ा कम हो जाती है।

ताजी चोट हो, सूजन हो,या पैर में मोच आगया हो तो ठन्ढ़ी सिकाई यानि कोल्ड बैग का इस्तेमाल करें। 48 से 72 घंटे से पहले गर्म बैग से सिकाई न करें। गर्म सिकाई करने पर उस जगह पर सूजन और दर्द और बढ़ जाएगा।

दौड़ने,खेलने,ब्यायाम करने या गिरने की वजह से पैर में मोच या चोट आ जाए तो ठंढे बैग से 2-3 दिनों तक सिकाई करें। एक बार में 5 से 10 मिनट तक सिकाई करें।

यदि शरीर के किसी हिस्से में सूजन है और उसके साथ त्वचा पर चोट लगी है जैसे रगड़ या घाव हो गया हो तो ऐसे स्थान पर सीधे रूप से बर्फ से सिकाई न करें । घाव के आस पास सिकाई करें। सिकाई के लिए सीधे तौर पर बर्फ का इस्तेमाल नहीं कर आइस बैग का इस्तेमाल करें या दो पोलिथीन में बर्फ डाल कर सिकाई करना ठीक होगा।

ब्यायाम करने के क्रम मेँ सूजन आ रही हो तो बर्फ की सिकाई करना उचित है।

टेंडोनाइटिस, जिसमें मांसपेशियों को हड्डी से जोड़ने वाले टिशू मेँ सूजन आ जाती है,ऐसा होने पर गर्म सिकाई से परहेज करना चाहिए क्यूंकि इसमें दर्द बढ़ सकता है। यहाँ ठन्ढ़ी सिकाई करनी चाहिए।


:--- मोहन”मधुर”

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