जब मेरी शिकायत पर प्रखण्ड विकास पदाधिकारी का स्थानांतरण हुआ



यहाँ मै यह बताना चहता हूँ कि सरकारी अधिकारी योजनाओं के लक्ष्य पूरा करवाने के नाम पर राजनेताओं की साँठ-गांठ से बैंक अधिकारियों को अपने चंगुल में फँसाने के लिए किस प्रकार तरह तरह के हथकंडे अपनाते हैं। इसके कारण बैंक कर्मियों को खासकर ग्रामीण एवं अर्धशहरी क्षेत्रों की शाखाओं में कैसी कैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। जिससे बैंक शाखा की उत्पादकता पर भी असर पड़ता है।

बात उन दिनो की है जब मैं तत्कालीन पूर्णिया जिले की एक शाखा में कृषि बित्त पदाधिकारी (A॰F॰O॰) के रूप में पदस्थापित हुआ था।

यहाँ नए ऋणों के वितरण के दबाब के कारण मैंने शाखा प्रबन्धक को भारी परेशानियों से जूझते देखा। शाखा में 4000 से अधिक ऋण खाते थे। जिसमें वसूली बिल्कुल नगण्य थी। मेरे मन में यह खयाल आया कि ऋण आवेदन पत्रों की प्रोसेसिंग यदि सही ढंग से की जाए तो आवेदकों की संख्या खुद व खुद घट जाएगी और शाखा का दबाब भी। इसके लिए पुराने ऋणों की वसूली के लिए शाखा का ग्रामवार रजिस्टर अद्यतन करना एवं पुराने ऋणियों की सूची से नए आवेदनों का मिलान करना जरूरी लगा। इस हेतु मै प्रयास करना चाहता था लेकिन यह तभी संभव था जब कुछ दिनों के लिए ऋणों के वितरण को रोक दिया जाए। इसके लिए प्रयास करने पर उच्चाधिकारियों से अनुमति भी मिल गयी एवं अगले आदेश तक ऋण वितरण पर रोक लगा दी गयी।

मैंने बड़ी मेहनत के साथ ग्रामवार रजिस्टर अद्यतन करना शुरू किया। इधर बैंक के बाहर और प्रखण्ड कार्यालय में छुटभैया नेताओं और दलालों द्वारा यह बात फैला दी गयी कि फील्ड ऑफिसर द्वारा ऋण वितरण रोकवा दिया गया है। जिसके कारण बैंक में प्रखण्ड द्वारा और अधिक आवेदन भेजे जाने लगे और बैंक में आवेदकों की भीड़ भी बढ़ गयी। मैंने दिन रात मेहनत कर ग्रामवार रजिस्टर अद्यतन कर आवेदन पत्रों का मिलान किया तो पुराने ऋनों के चूककर्ता होने के कारण बड़ी संख्या में आवेदन छ्ंटने लगे। इस स्थिती से प्रखण्ड के नेताओं व दलालों में खलबली मच गयी। अब,उनके द्वारा प्रखण्ड कार्यालय के इशारे पर मेरे विरुद्ध ब्यूह रचना की गयी। मेरे विरुद्ध अनेक प्रकार की नकली शिकायतों के आवेदन पत्रों पर गांव के लोगों से हस्ताक्षर करवाकर मंगवाये गये और 20- सूत्री कार्यक्रम की मासिक बैठक मे विधायक के समक्ष उन आवेदनों को प्रस्तुत कर उनसे इसपर कार्रवाई की मांग की गयी। इस बैठक में मैं अपने शाखा प्रबन्धक के साथ उपस्थित था।

इस कार्रवाई की मांग के जवाब में विधायक द्वारा प्रखण्ड विकास पदाधिकारी से कहा गया कि ----- आप इन आवेदनों की जाँच कर अगली बीस सूत्री की बैठक में रिपोर्ट प्रस्तुत करें,उसके बाद “मैं फील्ड ऑफिसर पर पुलिस में एफ आई आर करूंगा।“

इस जालसाजी पर हमलोगों के शरीर में खून उबलने लगा। हम दोनों (मैं और शाखा प्रबन्धक) उसी समय बैठक के प्रोसीडिंग्स में अपनी आपत्ति दर्ज़ करने के अनुरोध के बाद बैठक का बहिष्कार करने की घोषणा करते हुए वहाँ से वापस अपनी शाखा चले आए।

इसके अगले भाग में पढ़ें फिर क्या हुआ? (भाग-2 .....अगले ब्लॉग में)


:--- मोहन”मधुर”


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