गणतन्त्र एवं गणतन्त्र दिवस



हमारा देश आज 73 वां गणतन्त्र दिवस मना रहा है। यह हमारे लिए अत्यधिक गौरव की बात है कि भारत की इस धरती से ही गणतन्त्र का अभ्युदय हुआ था। यानि हमारे देश ने ही सारी दुनिया को गणतन्त्र का पाठ, गणतन्त्र का विचार या गणतन्त्र की परिभाषा दिया था।

यह बात ईसा पूर्व 7 वीं सदी की है जब पहली बार गणतन्त्र के विचारों का अभ्युदय लिच्छवि राजतंत्र में हुआ था और राजतंत्र प्रजातंत (गणतंत्र) में परिणत हो गया था। इस महान विचारधारा के श्रोत का श्रेय लिच्छवि राजाओं को जाता है,जिनके उदार मस्तिष्क ने इस शासन-तंत्र को जन्म दिया। हमें यह अच्छी तरह मालूम है की राज-तंत्र और प्रजा-तंत्र में कितना अंतर होता है जहां राजा द्वारा ही शासन की बागडोर प्रजा को सौप दी गई हो वह राजा कितना महान रहा होगा। ऐसे उदार महापुरुष भारत की धरती ही पैदा कर सकती है।

बुद्ध काल की बात है, वैशाली, बिहार के प्राचीन गणराज्यों में सबसे बड़ा एवं शक्तिशाली राज्य था। इस गण-राज्य की स्थापना सूर्य-वंशी राजा इच्छवाकू के पुत्र विशाल ने की थी,जिनके नाम पर "वैशाली" गणराज्य का नाम पड़ा । यही वह राज्य था जिसे गण-तंत्र का संसार का पहला राज्य माना जाता है। यहीं से गण-तंत्र की उत्पत्ति हुई और पूरी दुनिया को गण-तंत्र का संदेश मिला।

हमारे देश में मुगलों के शासान के बाद फिरंगियों का शासन हुआ । हम जानते हैं कि कितने संघर्ष और कितने बलिदानों के बाद हमारा देश 15 अगस्त 1947 को अंग्रेजों की 200 वर्षों की गुलामी से मुक्त हुआ ।

अब, आज़ादी के बाद सवाल था, हमारे देश का शासन तंत्र कैसा हो? इसके लिए संविधान की रचना करने की आवश्यकता थी। इस कार्य के लिए बाबा साहब भीम राव अम्बेद्कर सबसे उपयुक्त माने गए। उन्हे ही यह कार्य भार सौपा गया। उनके अथक परिश्रम के बाद संविधान बनकर तैयार हुआ। आज इसी संविधान के कारण हमारा देश सम्पूर्ण गणतन्त्र है। इस संविधान को 26 नवंबर1949 को भारतीय संविधान सभा द्वारा मंजूरी दी गई।

अब, सवाल था इस संविधान को लागू करने की तिथि क्या हो? 26 जनवरी 1929 को अंग्रेजों की गुलामी के खिलाफ कॉग्रेस ने “पूर्ण स्वराज” का नारा दिया था एवं 26 जनवरी 1930 को भारतीय राष्ट्रीय कोंग्रेस ने भारत को “पूर्ण स्वराज” घोषित किया था । उस दिन से 26 जनवरी 1947 तक प्रत्येक वर्ष स्वतन्त्रता दिवस के रूप में भारतीय राष्ट्रीय कॉंग्रेस द्वारा मनाया जाता था । 15 अगस्त 1947 को जब भारत आज़ाद हुआ तो स्वतन्त्रता दिवस 15 अगस्त को मनाया जाने लगा ।चूंकि स्वतन्त्रता प्राप्ति की यही वास्तविक तिथि थी। अतः यह तय हुआ कि 26 जनवरी को ही गंतंत्रदिवस घोषित किया जाये।अंततः 26 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान पूर्ण रूप से लागू कर दिया गया । हमारा देश एक गणतांत्रिक देश घोषित कर दिया गया । तब से हमारा देश प्रत्येक वर्ष 26 जनवरी को गणतन्त्र दिवस की वर्षगांठ धूम धाम से मनाता आ रहा है।

मित्रों! हम जिस उल्लास और उत्साह से गणतन्त्र दिवस मनाते आ रहे हैं उसी उत्साह और ईमानदारी से हमें गणतन्त्र की गरिमा का भी पालन करना चाहिए। हमारा गणतन्त्र समय का शिकार होते जा रहा है हम सबों ने देखा है कुछ वर्ष पूर्व तक यह बल तंत्र का शिकार था और अब ऐसा लगता है कि हमारा (लोकतंत्र) गण-तंत्र,धन-तंत्र के कब्जे में जा रहा है। राजनैतिक दलों द्वारा चुनावों में किए जाने वाले रैलियों और प्रचार पर पानी की तरह पैसे बहाये जा रहे हैं। इसमें कोई संदेह नहीं कि किए जाने वाले हर खर्च का भार निरीह जनता को ही अंततः वहन करना पड़ता है। इस परिपाटी पर हमारी सरकार और जनता दोनों को पुनः विचार करना चाहिए।पैसों के खर्च के इस अंधी दौड़ से हमें बचना चाहिए। इस पैसे को बचा कर इसका उपयोग विकास के कार्यों मे किए जाएँ तो यह एक स्वस्थ सोच होगा और हमारे गणतन्त्र की गरिमा का सम्मान होगा । तभी हमारा गणतन्त्र सफल कहलाने योग्य होगा।


:--- मोहन “मधुर”

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