एक स्वगत-संवाद


एक स्वगत-संवाद


ऐ दिल तू मत शोर मचा ......

इक तू ही नहीं इस दुनिया में....

गम के मारे और भी हैं !

तू ही अकेला मत चल...ले !

दर्द के मारे और भी हैं !

कल होगी फिर शुब......ह तेरी...

इस शाम के मारे और भी हैं !

ऐ दिल तू मत शोर मचा.......

हँसती है दुनियाँ तो हँसने दे......

दरिया के किनारे और भी हैं !

ऐ दिल तू मत शोर मचा.......

इक तू ही नहीं इस दुनिया में.....

दर्द के मारे और भी हैं !

दर्द के मारे............


:-- मोहन”मधुर”

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