एक सरस्वती की विदाई

Updated: Feb 7


कल सरस्वती पूजा था आज माँ सरस्वती की प्रतिमा के विसर्जन का दिन है। आज 6 फरवरी 2022 को शुबह शुबह खबर आई कि स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर जी अब इस दुनिया में नहीं रहीं। कोरोना संक्रमित होने के कारण उन्हें मुंबई के अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उन्होने अपना पूरा जीवन संगीत को समर्पित कर दिया था। लता जी के निधन का समाचार करोड़ों दिलों की धड़कनों को रोक देने वाला है। हर दिल अजीज लता जी अपने स्वर-सुरों के कारण न जाने कितनी पीढ़ियों के दिलों में अबतक बस चुकी थीं और उनकी आवाज आगे भी कितनी पीढ़ियों को शुकून देती रहेगी।

आज उनके निधन का समाचार सुनकर मुझे मेरा बचपन याद आने लगा। जहां तक मुझे याद है, संभवतः मैं तीसरी या चौथी कक्षा का छात्र था, मेरे घर में नया नया फिलिप्स कंपनी का रेडियो खरीदा गया था। मेरे दरवाजे पर शुबह 7 बजते बजते रेडियो सुनने वालों की भीड़ लग जाती थी क्योंकि 7 बजे के आसपास समाचार देने का समय होता था। इससे पहले भक्ति संगीत होता था। आज भी याद है पूर्व राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद के निधन का समाचार एवं उनकी शव यात्रा का रेडियो पर आँखों देखा हाल का प्रसारण। पंडित जवाहर लाल नेहरू की शव यात्रा के आँखों देखा हाल का प्रसारण मेरे कानों में आज भी गूँजते हैं। समाचार के बाद विविध भारती कार्यक्रम पर गाना लगा दिया जाता था। मैं घर के किसी भी कोने या दरवाजे पर कहीं भी चाहे किसी काम को करता रहता गाने के एक एक शब्द को सुन कर आनंद लेता था। खास कर लता जी के गाने मुझे उसी समय से पसंद आने लगे थे ,जब मैं मिडल स्कूल का छात्र था। सच पूछा जाये तो लता जी के स्वरों में जो आकर्षण था वह किसी और गायीका या गायक में कहाँ?

लता जी का जन्म 28 सितम्बर 1929 को इंदौर में हुआ था। बचपन में उनका नाम हेमा रखा गया था। उनकी माता का नाम शेवन्ती मंगेशकर था। पंडित दीनानाथ मंगेशकर की पहली पत्नी नर्मदा की मृत्यु के बाद उन्होने उनकी छोटी बहन शेवन्ती को अपने पास रखा था, जिनकी सबसे बड़ी श्ंतान लता जी थीं। दीनानाथ मंगेशकर मूल रूप से गोवा के रहनेवाले थे। उनके गाँव का नाम मंगेशी था जिस नाम से उन्होने अपना सर नेम बनाया था। लता की माँ गुजराती और पिता मराठी पंडित थे। वे मराठी संगीतकार, शास्त्रीय गायक और थिएटर ऐक्टर थे। लता जी को संगीत की शिक्षा अपने पिता दीनानाथ मंगेशकर द्वारा मिली थी। जब लताजी 5 वर्ष की थीं तभी उन्होने संगीत सीखना शुरू कर दिया था। गायन की शुरुआत उन्हों ने 13 वर्ष की उम्र से ही कर दिया था। 16 दिसम्बर 1941 को उन्होने पहली बार रेडियो पर गाना गाया। जब लता 13 साल की थीं तो 1942 में उनके पिता की मृत्यु हो गई। 1945 में जब लता जी 16 साल की थीं तो इंदौर से वे बम्बई शिफ्ट हो गईं। लता जी 5 भाई बहन थीं। उनके बाद तीन बहनें मीना,आशा,उषा और भाई हृदय नाथ थे। यह लता जी की महानता है, कि छोटी उम्र में ही पिता की मृत्यु के बाद परिवार में सबसे बड़े होने के कारण पूरे परिवार की ज़िम्मेदारी अपने कंधों पर लेली और आजीवन कुंवारी रहकर अपने को परिवार के प्रति समर्पित कर दिया। ऐसी महान आत्मा थीं लता जी। आज की तिथी में उनकी उम्र 92 वर्ष थी। उन्होने 75 वर्ष की उम्र तक गाना जारी रखा। उन्होने 30 हजार से अधिक गीतों को अपने स्वर में गाया था। जो 30 से अधिक भाषाओं में है। 10 हजार से अधिक उनके हिन्दी भाषा के गाने हैं। उनके मधुर स्वभाव,ओजस्वी वाणी, कोकिल स्वर और देवी तुल्य विचारों के कारण आज उनकी कीर्ति गाथा सिर्फ भारत में ही नहीं देश विदेशों तक में फैली हुई हैं। उनके द्वारा गए हुए गीतों को संसार के अन्य देशों में भी उतना ही सम्मान प्राप्त है जितना भारत में। उनके स्वर में बजते हुए गीत अनायास ही दूरतक के लोगों के ध्यान अपनी ओर खींच लेते हैं । गीतों में प्रयुक्त शब्दों के भावों के अनुरूप स्वरों का उतार चढ़ाव ऐसा कि आपके दिल को खींच कर कलेजे से बाहर निकाल लेने की शक्ति से भरा हो। इसप्रकार,लता जी के स्वरों की कला की जितनी प्रशंशा की जाये वह बहुत कम है। तभी तो उन्हें तरह तरह के अवार्डों से सम्मानित किया गया था----1969 में पद्म भूषण,1989 में दादा साहब फाल्के पुरष्कार, 1999 में पद्म विभूषण, 2001 में केंद्र सरकार द्वारा भारत रत्न,और आखिरी बार टीआरए की मोस्ट डिजायेर्ड अवार्ड से नवाजा गया था। इसप्रकार 51 साल में उन्हें 75 से अधिक अवार्ड मिले थे।

वह तो मानों साक्षात माता सरस्वती का अवतार थीं। तभी तो आज सरस्वती पूजा के दूसरे दिन देश उनकी विदाई कर रहा है। वो हमारे देश ही नहीं विश्व की स्वर कोकिला थीं। हम इस सरस्वती माता को शत शत नमन करते हैं। उनकी आत्मा को चीर शांति मिले और वे अपना आशीर्वाद इस देश पर आगे भी बरसाती रहें ताकि इस देश को उनके जैसी स्वर साम्राज्ञी फिरसे प्राप्त होने का अवसर मिले।

उनकी अमर गाथा युग युग तक गायी जाती रहेंगी उनकी आवाज देश के हर कोने में हर दिल की धड़कनों से जुड़ी रहेंगी। उनके गीतों की ये पंक्तियाँ बरबस दिल में हलचल पैदा कर देती हैं और करती रहेंगी ----


1.पास आइये कि हम नहीं आएंगे बार-बार, बाहें गले में डाल कर हम रोएँ तार...तार...... । आँखों से फिर प्यार की बरसात हो....न....हो....,शायद इस जनम में मुलाक़ात हो...न...हो॥

2. हमको मिली हैं आज ये घड़ियाँ नसीब से, जी भर के देख लीजिये हमको करीब से....., फिर आपके नसीब में ये बात हो न हो ...... शायद फिर इस जनम में मुलाक़ात हो न हो...... ।

3. सजने लगे आँखों में कुछ ऐसे सपने.........जैसे बुलाये कोई,......नैनों से अपने.....नैनों से अपने.......। ये शमा शमा है ये प्यार का.....।

4. कहीं दीप जले कहीं दिल ........ओ ओ ओ जरा देख ले आकार ......परवाने..........। तेरी कौन सी है मंजिल ......

5. ऐ मेरे वतन के लोगों जरा आँख में भर लो पानी .......... ।

6. तुम मुझे यूं भुला न पाओगे.....जब कभी भी ....सुनोगे गीत मेरे........संग संग तुम भी गुण गुनाओगे.....।

और ये सही है कि हम उन्हें युगों तक भूल नहीं पाएंगे। अलविदा !अलविदा! अलविदा! लता जी......


:---मोहन "मधुर"


138 views4 comments